RAG BHAIRAV
₹ 179₹ 199
In Stock
🚚 Delivery in 2-5 days💵 Cash on delivery available💳 UPI, cards, net banking🛡 7-day replacement support ▶
Still Doubtful? Check our Bookstagram
@paperbound.books · Real unboxings from real customers
→
About this book
पिता और पुत्री के बीच कितने भी वैचारिक मतभेद हों, लेकिन रक्त संबंध एवं पूर्व जन्म का ऋणानुबंध होने के कारण वे हमेशा एक-दूसरे से निकट ही रहते हैं. . .अपने तो अपने ही होते हैं का अमर संदेश देने वाला नि:संदेह यह एक कालजयी उपन्यास है’— रांगेय राघव भैरव बाबू बोले, ‘अरे मैंने देखा कि उस आदमी को छुरा मार दिया! ख़ून से सना छुरा लेकर लड़का उस गली की तरफ भाग गया।’ ‘ज़रूरत क्या है आपको इन सब बातों में उलझने की? बूढ़े आदमी हैं आप। यदि पुलिस आकर हमें परेशान करेगी तब क्या होगा?’ विमल मित्र का यह रोचक एवं प्रेरक उपन्यास है, इसमें नई और पुरानी पीढ़ी के टकराव को जीवंत ढंग से उकेरा गया है।Reader reviews
Trusted by readers across India
4.312 reviews
★★★★★
Readers choose Paperbound for fast delivery, careful packing and checkout-backed order updates.
Details
- Category
- Fiction
- Publisher
- 99Bookstore
- ISBN
- Available on request
- Sold by
- Paperbound